गुरुवार, अप्रैल 28, 2011

मैं तो बस सपनों में जी रहा हूँ

बात सुन ले लाला ! मैं मजाक नहीं कर रहा । मैं तेरे को 1 फोटो भेज रहा हूँ । ये फोटो कल तक मेरे ई-मेल के उत्तर के साथ लेख में छपनी चाहिये । अगर फ़ोटो के साथ काट-छाँट की । तो { अपशब्द } तोड दूँगा । छोङूँगा नहीं । पूरी फ़ुल फोटो छापना । ताकि लोगो को पता चले कि " श्री विनोद त्रिपाठी जी " की पसन्द कितनी धमाकेदार और पटाकेदार है ।
अब मैं आता हूँ । असली पोइन्ट पर । मेरा सवाल ये है बनारसी बाबू कि ये जो फोटो में माल है । मैं ऐसे माल के साथ अगले जनम में शादी करना चाहता हूँ । इस जनम में हो नही सकती । क्युँ कि उमर 50 के आसपास है । और मैं इतना अमीर भी नही कि दूसरी शादी कर लूँ ।
 मेरी धर्मपत्नी बेचारी ( अब मैं कहूँ कि ना कहूँ.....रहने ही देता हूँ ) कसम सब्जी मन्डी की । आज तक बिल्कुल सुख नही मिला । मेरी पत्नी की शकल ( क्या बताऊँ.... बस लानत है ) और न बेचारी के पीछे कोई गोलाई है । और ना ही सामने मलाई है । मैं तो ससुर प्यासा ही रह गया ।
कसम सबजी मन्डी की । मैं तो बस सपनों में जी रहा हूँ । इसलिये मेरे लाला । ये बता कि मैं ऐसा कौन सा काम करुँ । या ऐसा कौन सा पुन्य करुँ । या ऐसी कौन सी साधना करुँ । ताकि मुझे अगले जनम में इस फोटो में जो लडकी है । ऐसी पत्नी या माशुका मिले । क्या ऐसी पत्नी या माशुका के लिये द्वैत साधना ठीक रहेगी ? या अद्वैत साधना ठीक रहेगी ?  जरा खुलकर पोस्टर छाप दे ।
कल..मेरा मतलब कल रविवार है । मुझे भी छुटी है । इसलिये कल तक मेरी इस समस्या का समाधान कर दे । मैं तरस रहा हूँ । प्यार करने के लिये । आशिकी ने बरबाद कर दिया । ये इश्क बडा बेदर्दी है । मुझको लगती सर्दी है । बस कल तक मेरे इस जवाब रुपी बम्ब को अपनी तोप रुपी सवाल से उडा दे । और सुन ले भालु । अगर मेरे मैसेज मे कोई काट-छाँट की । तो फ़िर ( अब मैं कहूँ कि ना कहूँ....समझ गये न )

- ये एक प्रोफ़ेसर का ई मेल है । { जैसा कि इन्होंने स्वयँ मुझे ई मेल द्वारा बताया । } कोई भी सोच सकता है । इस मेल का क्या उत्तर दिया जा सकता है । साधना करना लोग हँसी मजाक समझते हैं । वास्तविक साधना तो पहले चरण में कामवासना कामभावना के त्याग की जोरदार माँग करती है ।

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अच्छी पत्नी । सर्वांग सुन्दर पत्नी । बच्चे । परिवार । धन आदि का मिलना सभी कुछ इस जन्म के पुण्यकर्म । धर्म । दान । परोपकार आदि पर निर्भर होता है । जैसा बोओगे । वैसा काटोगे । वाला ही नियम है । भक्ति से भी भाग्य बनता है । लेकिन इससे पहले जो बुरे कर्म हो चुके हैं । उसका भोग के रूप में एक लम्बा निपटारा करना होता है ।

*** ये इनके द्वारा भेजी गयी फ़ोटो नहीं है । नेट पर आते ही  किसी भी फ़ोटो की आटोमेटिक एक नम्बर ID बन जाती है । और बहुत से फ़ोटो कापीराइट होते है । अतः किसी भी प्रकार का झमेला हो सकता है । और दूसरी बात इंटरनेट का क्राल ऐसी ID को पहचान कर बिना किसी चेतावनी के ब्लाग को डिलीट कर देता है । ये सिस्टम फ़ुल्ली आटोमेटिक है । अतः नेट की फ़ोटो छापना खतरनाक हो सकता है ।

2 टिप्‍पणियां:

Patali-The-Village ने कहा…

जो आदमी हमेशा काम वासना में डूबा रहता है वह साधना कर ही नहीं सकता है|

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

धन्‍य।

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विलुप्‍त हो जाएगा इंसान?
कहाँ ले जाएगी, ये लड़कों की चाहत?

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